Sunday, August 5, 2018
2018 की प्रतियोगी परिक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स प्रैक्टिस सेट
प्रिय पाठकों,
आज हम बहुत ही महत्वपूर्ण करेन्ट अफेयर्स के प्रैक्टिस सेट शेयर कर रहे है। ये प्रैक्टिस सेट अापके SSC, CGL, CPO, CHSL, RRB, RBI, तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत ही लाभकारी है।
Our Current Affairs Free Practice Set Paper in Hindi PDF cover all important solved questions. You can download Current Affairs Free Practice Set Paper vey easily by clicking on the download button below.
About PDF :-
1. Subject – Current Affairs Free Practice Set Paper
2. Format – PDF
3. Language – Hindi
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2. Format – PDF
3. Language – Hindi
Current Affairs Free Practice Set Paper in Hindi for PDF – Click Here
Friday, August 3, 2018
यूपी पुलिस में 5वीं पास के लिए भर्तियां, 16 अगस्त तक करें आवेदन
प्रिय पाठकों
उत्तर प्रदेश पुलिस के रेडियो विभाग ने समूह 'घ' संदेश वाहक के पदों के भरे जाने हेतु विज्ञप्ति जारी की है।
मान्यताप्राप्त संस्थान से 5वीं पास और 18 से 30 वर्ष तक के उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। सभी वर्गों के लिए आवेदन निःशुल्क है। उम्मीदवार 16 अगस्त से पहले ऑफलाइन आवेदन करें।

वेतनमान: 18,000- 56,900/- प्रति माह
उत्तर प्रदेश पुलिस के रेडियो विभाग ने समूह 'घ' संदेश वाहक के पदों के भरे जाने हेतु विज्ञप्ति जारी की है।
मान्यताप्राप्त संस्थान से 5वीं पास और 18 से 30 वर्ष तक के उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। सभी वर्गों के लिए आवेदन निःशुल्क है। उम्मीदवार 16 अगस्त से पहले ऑफलाइन आवेदन करें।

वेतनमान: 18,000- 56,900/- प्रति माह
चयन प्रक्रियाः स्किल टेस्ट और लिखित परीक्षा के आधार पर
8 सितंबर तक अंतिम परिणाम घोषित किया जा सकता है।
8 सितंबर तक अंतिम परिणाम घोषित किया जा सकता है।
PRATIYOGITA DARPAN HINDI AUGUST 2018 PDF
Dear Readers,
we are sharing Pratiyogita Darpan August 2018 PDF download in Hindi and English for the students who are preparing for IAS, Railway, MPPCS, Bank PO, SCC Exam, MBA, CAT, and other Competitive Examinations, From Monthly Current Affairs Magazine Pratiyogita Darpan August 2018 PDF in Hindi and English can download Free Pratiyogita Darpan August 2018 The following points are included in the PDF
If you are preparing for all the competitive exams, and you are worried about current affairs, then today we have brought for you the solution, as a book, whose name is Darpan competition "Partiyogita Dardan” in all the edition on Darpan, you will find previous year paper , national news, international news, famous personalities, extensive details of famous events, as well as solutions for many competitive examinations.
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This issue of today is in the Hindi language which is a boon for Hindi language test takers.
Through this book, you will be able to prepare for all the upcoming competitive examinations like UPSC, UPPCS, UPSSSC VDO, SSC, Gram panchayat Adhikari, Railway RRB, Bank Exam etc.
Through the simple study of PRATIYOGITA DARPAN HINDI ENGLISH AUGUST 2018, you will be able to get as many numbers as possible in your exam. All the best wishes.
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If you look at PRATIYOGITA DARPAN HINDI AUGUST 2018, you will be able to go to National Events, International Events, Economic Commercial Scenario, Latest General Knowledge, What to do in the Civil Services Preliminary Examination? Employment News, Sports Current Affairs, National Events Related to Science and Technology And international developments, young talents, and most importantly memorable facts, World Scenario, India's Chief Historical Personality, Objective General Studies same matter will be cover in English PRATIYOGITA DARPAN ENGLISH AUGUST 2018
Pratiyogita Darpan August 2018 PDF in Hindi
Thursday, August 2, 2018
Wednesday, August 1, 2018
Tuesday, July 31, 2018
RPSC RAS Admit Card 2018:
Today Rajasthan Public Service Commission has release Admit Card for Rajasthan State and Subordinate Services Combined Competitive Examination 2018
Candidates who had applied for the RAS/RTS Combined Competitive Examination 2018 must Download Admit Card.
Click Here to Downlad RPSC RAS Admit Card 2018.
Top Current Affairs For RRB ALP Exam 2018
Hello Readres
RRB ALP EXAM SCHEDULE FROM 9TH AUGUST. So our Team Decide to Upload Top Current Affairs For RRB ALP Exam 2018
फ्रांस ने किस वर्श तक सभी तेल और गैस उत्पादन पर रोक के लिए कानून बनाई है।→2040
•बाल दिवस के अवसर पर बच्चों हेतू न्दपबम िकी और से किस कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।→किड्स टेक ओवर एनएसई
•महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी रिर्पोट के अनुसार महिला सुरक्षा के लिहाज से कौन-सा राज्य बेहतर स्थिति में है।→गोवा
•16वीं एषियन मेराथन चैम्पियनषीप में किसने स्वर्ण पदक जीता। →गेणी योगकल
•फ्रांस के पूर्व सांस्कृति मंत्री किसको न्छम्ैब्व् का नया प्रमुख बनाया गया।→आॅन्द्रे अजोले
•किस देष ने योग को खेल का दर्जा प्रदान किया ।→साऊदी अरब
•न्छव् ने सर्वसम्मति से किस पर नये प्रतिबंध लागू करते हुए परिश्कृत पेट्रोलियम पदार्थो पर उसकी बेहद सिमित कर दी है।→उत्तर कोरिया
•इसरो द्वारा बनाये गए सबसे वजली सेटैलाइट कौन-सा है।→ जीसैट- प्प्
•ग्रामीण क्षेत्र में पीनेवाला पानी की आपूर्ति सुधारने हेतू केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने किस योजना मंजूर की →राश्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम
•छप्ज्प् आयोग द्वारा आरंभ की गई किस राश्ट्रव्यापी मिषन के तहत अटल टिकरिंग लैब की स्थापना के लिए 1500 •स्कूलो का चयन किया गया।→अटल इनावेषन मिषन
•खेल मंत्रालय ने एंटी- डोंपिंग अपील पेनल में किसको षामिल किया।→वीरेन्द्र सहवाग
•किस ने हाल ही में कुवैत और सिंगापुर में प्रतिनिधी कार्यालय खोलने हेतू त्ठप् की मंजूरी प्राप्त कर ली है।→फेडरल ठंदा
•अमेरिका के चुनावों में जीत हासिल करनेवाली पहली ट्रांसजेंडर कौन बनी।→डानिका रोम
•किलर्स आॅफ द फ्लावर मून के लेखक कौन है।→डेविड ग्रैन
•उडिसा के किस षहर में देष का पहला हथियार संग्रहालय बनाया गया ।→चाँदीपुर
•किस षहर में हाल ही में प्रदूशित धुंध के कारन स्वास्थ्य अपात काल घोशित किया गया। →दिल्ली
•अमेरिकी राश्ट्रपति के दौरे से राजस्थान का कौन-सा गाँव काफी चर्चित रहा।→नायेला
•किस बैंक ने RTGS और NEFT के जरिये किये जानेवाले लेन-देन को 1 Nov से निःषुल्क किया। →भ्ण्क्ण्थ्ण्ब्
•केरल तथा लक्ष्यद्वीप समूह के लिए तीन दिनों का तटीय सुरक्षा अभ्यास का नाम क्या था।→सागर कवच
•सुनामी जागरूकता दिवस कब मनाया जाता है।→5 नवम्बर
•रेल मंत्रालय ने 14 श्रनसल 2019 को किसके बीच पहली सोलर उर्जा से संचालित डेमू ट्रेन का परिचालन प्रारंभ →सराय रोहिल्लासे फारूक नहार
•India 2000 A vision for the new milinium लेखक कौन है।→A.P.J क्लाम और वाई S राजन
•किस सरकार ने 55000 हेक्टेयर भूमि को सचिने हेतू नैव कृश्ण चैधरी सेवा उन्नयन योजना प्रारंभ की।→उडिसा सरकार
•किसके द्वारा सोफिया नामक रोबोट को देष की अधिकारिक नागरिकता प्रदान की गई।→सऊदी अरब
•मानव संसाधन विकाष मंत्री प्रकाष जावेडकर ने पूर्व राश्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को किसने पुस्तक भेट की।→गुरू संग्रह
•कर्नाटक राज्य की सरकार द्वारा किसको धार्मिक अल्पसंख्यक का स्तर प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव मार्व 2018 में भेजा। →लिंगायत समुदाय
•आन्ध्रप्रदेष में पहला पूर्ण रूप से महिला द्वारा संचालित कौन-सा रेलवे स्टेषन मार्च 2018 में बना। →चन्द्रागिरी
•भारत के किसने प्ैैथ् विष्व कप निषानेबाजी में 20 मीटर एयर पस्टिल स्पद्र्धा में नये रिकोर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता ।→षाहजर रिजवी
•मार्च 2018 में लोंस एजिल में प्रदान किए गए 90वें आॅस्कर पुरस्कार में किसको सर्वश्रेश्ट फिल्म मिला।→द षेश आॅफ वाटर
RRB ALP EXAM SCHEDULE FROM 9TH AUGUST. So our Team Decide to Upload Top Current Affairs For RRB ALP Exam 2018
फ्रांस ने किस वर्श तक सभी तेल और गैस उत्पादन पर रोक के लिए कानून बनाई है।→2040
•बाल दिवस के अवसर पर बच्चों हेतू न्दपबम िकी और से किस कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।→किड्स टेक ओवर एनएसई
•महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी रिर्पोट के अनुसार महिला सुरक्षा के लिहाज से कौन-सा राज्य बेहतर स्थिति में है।→गोवा
•16वीं एषियन मेराथन चैम्पियनषीप में किसने स्वर्ण पदक जीता। →गेणी योगकल
•फ्रांस के पूर्व सांस्कृति मंत्री किसको न्छम्ैब्व् का नया प्रमुख बनाया गया।→आॅन्द्रे अजोले
•किस देष ने योग को खेल का दर्जा प्रदान किया ।→साऊदी अरब
•न्छव् ने सर्वसम्मति से किस पर नये प्रतिबंध लागू करते हुए परिश्कृत पेट्रोलियम पदार्थो पर उसकी बेहद सिमित कर दी है।→उत्तर कोरिया
•इसरो द्वारा बनाये गए सबसे वजली सेटैलाइट कौन-सा है।→ जीसैट- प्प्
•ग्रामीण क्षेत्र में पीनेवाला पानी की आपूर्ति सुधारने हेतू केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने किस योजना मंजूर की →राश्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम
•छप्ज्प् आयोग द्वारा आरंभ की गई किस राश्ट्रव्यापी मिषन के तहत अटल टिकरिंग लैब की स्थापना के लिए 1500 •स्कूलो का चयन किया गया।→अटल इनावेषन मिषन
•खेल मंत्रालय ने एंटी- डोंपिंग अपील पेनल में किसको षामिल किया।→वीरेन्द्र सहवाग
•किस ने हाल ही में कुवैत और सिंगापुर में प्रतिनिधी कार्यालय खोलने हेतू त्ठप् की मंजूरी प्राप्त कर ली है।→फेडरल ठंदा
•अमेरिका के चुनावों में जीत हासिल करनेवाली पहली ट्रांसजेंडर कौन बनी।→डानिका रोम
•किलर्स आॅफ द फ्लावर मून के लेखक कौन है।→डेविड ग्रैन
•उडिसा के किस षहर में देष का पहला हथियार संग्रहालय बनाया गया ।→चाँदीपुर
•किस षहर में हाल ही में प्रदूशित धुंध के कारन स्वास्थ्य अपात काल घोशित किया गया। →दिल्ली
•अमेरिकी राश्ट्रपति के दौरे से राजस्थान का कौन-सा गाँव काफी चर्चित रहा।→नायेला
•किस बैंक ने RTGS और NEFT के जरिये किये जानेवाले लेन-देन को 1 Nov से निःषुल्क किया। →भ्ण्क्ण्थ्ण्ब्
•केरल तथा लक्ष्यद्वीप समूह के लिए तीन दिनों का तटीय सुरक्षा अभ्यास का नाम क्या था।→सागर कवच
•सुनामी जागरूकता दिवस कब मनाया जाता है।→5 नवम्बर
•रेल मंत्रालय ने 14 श्रनसल 2019 को किसके बीच पहली सोलर उर्जा से संचालित डेमू ट्रेन का परिचालन प्रारंभ →सराय रोहिल्लासे फारूक नहार
•India 2000 A vision for the new milinium लेखक कौन है।→A.P.J क्लाम और वाई S राजन
•किस सरकार ने 55000 हेक्टेयर भूमि को सचिने हेतू नैव कृश्ण चैधरी सेवा उन्नयन योजना प्रारंभ की।→उडिसा सरकार
•किसके द्वारा सोफिया नामक रोबोट को देष की अधिकारिक नागरिकता प्रदान की गई।→सऊदी अरब
•मानव संसाधन विकाष मंत्री प्रकाष जावेडकर ने पूर्व राश्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को किसने पुस्तक भेट की।→गुरू संग्रह
•कर्नाटक राज्य की सरकार द्वारा किसको धार्मिक अल्पसंख्यक का स्तर प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव मार्व 2018 में भेजा। →लिंगायत समुदाय
•आन्ध्रप्रदेष में पहला पूर्ण रूप से महिला द्वारा संचालित कौन-सा रेलवे स्टेषन मार्च 2018 में बना। →चन्द्रागिरी
•भारत के किसने प्ैैथ् विष्व कप निषानेबाजी में 20 मीटर एयर पस्टिल स्पद्र्धा में नये रिकोर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता ।→षाहजर रिजवी
•मार्च 2018 में लोंस एजिल में प्रदान किए गए 90वें आॅस्कर पुरस्कार में किसको सर्वश्रेश्ट फिल्म मिला।→द षेश आॅफ वाटर
Monday, January 22, 2018
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आओ पढ़ाई करे।
देश में पठन-पाठन के प्रति लगाव रखने और इस दिशा में समुचित कदम उठाये जाने की लगातार आवाज उठाने वाले लोगों का ध्यान कल की दो ताजा खबरों ने जरूर खींचा होगा। हमेशा की तरह एक चिंताजनक खबर यह थी कि आइआइटी जैसे संस्थानों तक को ढूंढ़ने के बावजूद काबिल शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राहत देने वाली खबर यह थी कि उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में अब पढ़ाई के साथ-साथ पढ़ाना भी जरूरी करने पर विचार किया जा रहा है।
उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि आगामी आम बजट में केंद्र सरकार द्वारा इस बारे में विधिवत घोषणा भी की जा सकती है। फिलहाल बीएड जैसे टीचिंग से जुड़े पाठ्यक्रमों में ही छात्रों को पढ़ने के साथ पढ़ाने की अनिवार्यता है। यह योजना लागू हो जाने के बाद स्नातक कोर्सो के छात्रों को हर सप्ताह कम से कम तीन घंटे पढ़ाना होगा। शिक्षण प्रशिक्षण की जरूरत को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों से अपनी सुविधा के अनुसार आसपास के शिक्षण संस्थानों में सेवाएं देने की बार-बार की अपीलों की वजह से ऐसे तमाम लोगों ने स्कूलों में पढ़ाने की सकारात्मक पहल की है। अगर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय की इस प्रस्तावित योजना ने मूर्त रूप ले लिया, तो स्कूलों में अध्यापकों की कमी की काफी हद तक भरपाई की जा सकेगी।1आकर्षण बढ़ाने की जरूरत1हर किसी की जिंदगी को सही दिशा देने में अध्यापक का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी को अपने जीवन में कोई न कोई कभी न भुलाये जा सकने वाले टीचर जरूर मिले होंगे। आज हमें देश के भावी कर्णधारों को गढ़ने वाले सबसे काबिल अध्यापकों की सबसे ज्यादा जरूरत है। पर विडंबना यह है कि पिछले एक-दो दशकों से टीचिंग को उपेक्षित पेशा जैसा मान लिया गया है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं की दिलचस्पी ज्यादा पैसे वाली आकर्षक नौकरियों में है। हालांकि हाल के वर्षो में प्राइमरी से लेकर कॉलेज-विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तक को मिलने वाली सैलरी और सुविधाओं में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है, इसके बावजूद टीचिंग के प्रति युवाओं में क्रेज जैसी कोई बात नहीं बन पा रही है। ऐसे में इस सबसे सम्मानित पेशे का प्रचार-प्रसार करने, इसमें और आकर्षण जोड़ने और युवा पीढ़ी को इसके प्रति आकर्षित करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत महसूस की जा रही है। जिस तरह एक कुम्हार या मूर्तिकार कच्ची मिट्टी को अपने कुशल हाथों से तराश कर तरह-तरह का मनभावन रूप दे देता है, उसी तरह एक अध्यापक भी बच्चों को संस्कार-ज्ञान-समझदारी की शिक्षा देकर जिम्मेदार नागरिक बनाने में अपना योगदान देता है। 1काबिल फैकल्टी की चुनौती!1दिल्ली, मद्रास, खड़गपुर सहित देश की सभी 23 आइआइटी में फिलहाल औसतन 35 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी की कमी है। खड़गपुर की स्थिति तो और भी बदतर है, जहां 69 फीसदी फैकल्टी के पद खाली हैं। सरकार के दबाव और इन संस्थानों द्वारा लगातार विज्ञापन दिए जाने के बावजूद सालाना 15 से 20 प्रतिशत पद ही भरे जा पा रहे हैं। सक्षम फैकल्टी न मिलने की बात पर आइआइटी मद्रास के निदेशक डॉ. भास्कर रामामूर्ति की यह बात उचित ही है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद कम ही छात्र ऐसे होते हैं, जो एक टीचर के रूप में अपना करियर आरंभ करना चाहते हैं। ज्यादातर छात्र विदेश की राह पकड़ लेते हैं। ऐसे में टीचिंग के प्रोफेशन के प्रति नए सिरे से आकर्षण पैदा किए जाने की जरूरत है, ताकि डॉक्टर, इंजीनियर, आइएएस, आइटी प्रोफेशनल, जर्नलिस्ट, वकील आदि पेशों की तरह छात्र भी स्कूली दिनों से ही अध्यापक बनने का सपना देख सकें और टीचिंग को अपने करियर की मंजिल मानकर आगे बढ़ सकें। ऐसी स्थिति उत्पन्न करने के लिए जितने जरूरी सरकारी उपाय हैं, उतना ही जरूरी हम सभी को अपना माइंड-सेट बदलने की भी है। सुकून, सम्मान और सुविधाएं टीचिंग के प्रोफेशन में अब सैलरी तो आकर्षक है ही, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि और किसी भी प्रोफेशन की तुलना में इसमें आज भी अधिकतम सुकून, सबसे अधिक सम्मान और सुविधाओं का होना है। अन्य नौकरियों की तरह इसमें अनावश्यक तनाव भी बिल्कुल नहीं है। हां, इस पेशे में आपका सम्मान इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसके प्रति कितनी ईमानदारी बरत रहे हैं, क्योंकि यह दूसरे पेशों की तरह कतई नहीं है। इसमें आपको देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझने की जरूरत होती है। आप सिर्फ एक बच्चे को ही नहीं पढ़ाते, बल्कि देश के एक जिम्मेदार नागरिक को तैयार करते हैं। उन्हीं में से कोई आप जैसा काबिल अध्यापक बनेगा, तो कोई देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, न्यायाधीश, कलेक्टर, दुनिया में देश को पहचान दिलाने वाले प्रोफेशनल कुछ भी बन सकता है। सोचिए, जब आपको पता चलता है कि आपके किसी शिष्य ने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की है, तो कितनी खुशी मिलती होगी। युवा बढ़ाएं कदम देश के युवाओं को भी यह सोचना होगा कि सिर्फ अपने लिए पद और पैसा कमाने में ही जीवन की सार्थकता नहीं है, बल्कि देश और समाज के लिए अपने दायित्वों को समझने और उन्हें पूरा करने में है। ऐसे में उन्हें टीचिंग के प्रति रुझान बढ़ाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इस ओर आएं। बदलते समय के मुताबिक खुद भी पढ़ें और अपडेट रहें, साथ ही शिक्षण संस्थानों आदि के जरिए या स्वयं की पहल से दूसरों को पढ़ाएं। हम सब ऐसा करेंगे, तो ही देश लगातार आगे की ओर बढ़ेगा।1श में पठन-पाठन के प्रति लगाव रखने और इस दिशा में समुचित कदम उठाये जाने की लगातार आवाज उठाने वाले लोगों का ध्यान कल की दो ताजा खबरों ने जरूर खींचा होगा। हमेशा की तरह एक चिंताजनक खबर यह थी कि आइआइटी जैसे संस्थानों तक को ढूंढ़ने के बावजूद काबिल शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राहत देने वाली खबर यह थी कि उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में अब पढ़ाई के साथ-साथ पढ़ाना भी जरूरी करने पर विचार किया जा रहा है। उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि आगामी आम बजट में केंद्र सरकार द्वारा इस बारे में विधिवत घोषणा भी की जा सकती है। फिलहाल बीएड जैसे टीचिंग से जुड़े पाठ्यक्रमों में ही छात्रों को पढ़ने के साथ पढ़ाने की अनिवार्यता है। यह योजना लागू हो जाने के बाद स्नातक कोर्सो के छात्रों को हर सप्ताह कम से कम तीन घंटे पढ़ाना होगा। शिक्षण प्रशिक्षण की जरूरत को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों से अपनी सुविधा के अनुसार आसपास के शिक्षण संस्थानों में सेवाएं देने की बार-बार की अपीलों की वजह से ऐसे तमाम लोगों ने स्कूलों में पढ़ाने की सकारात्मक पहल की है। अगर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय की इस प्रस्तावित योजना ने मूर्त रूप ले लिया, तो स्कूलों में अध्यापकों की कमी की काफी हद तक भरपाई की जा सकेगी।आकर्षण बढ़ाने की जरूरत1हर किसी की जिंदगी को सही दिशा देने में अध्यापक का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी को अपने जीवन में कोई न कोई कभी न भुलाये जा सकने वाले टीचर जरूर मिले होंगे। आज हमें देश के भावी कर्णधारों को गढ़ने वाले सबसे काबिल अध्यापकों की सबसे ज्यादा जरूरत है। पर विडंबना यह है कि पिछले एक-दो दशकों से टीचिंग को उपेक्षित पेशा जैसा मान लिया गया है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं की दिलचस्पी ज्यादा पैसे वाली आकर्षक नौकरियों में है। हालांकि हाल के वर्षो में प्राइमरी से लेकर कॉलेज-विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तक को मिलने वाली सैलरी और सुविधाओं में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है, इसके बावजूद टीचिंग के प्रति युवाओं में क्रेज जैसी कोई बात नहीं बन पा रही है। ऐसे में इस सबसे सम्मानित पेशे का प्रचार-प्रसार करने, इसमें और आकर्षण जोड़ने और युवा पीढ़ी को इसके प्रति आकर्षित करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत महसूस की जा रही है। जिस तरह एक कुम्हार या मूर्तिकार कच्ची मिट्टी को अपने कुशल हाथों से तराश कर तरह-तरह का मनभावन रूप दे देता है, उसी तरह एक अध्यापक भी बच्चों को संस्कार-ज्ञान-समझदारी की शिक्षा देकर जिम्मेदार नागरिक बनाने में अपना योगदान देता है। काबिल फैकल्टी की चुनौती! दिल्ली, मद्रास, खड़गपुर सहित देश की सभी 23 आइआइटी में फिलहाल औसतन 35 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी की कमी है। खड़गपुर की स्थिति तो और भी बदतर है, जहां 69 फीसदी फैकल्टी के पद खाली हैं। सरकार के दबाव और इन संस्थानों द्वारा लगातार विज्ञापन दिए जाने के बावजूद सालाना 15 से 20 प्रतिशत पद ही भरे जा पा रहे हैं। सक्षम फैकल्टी न मिलने की बात पर आइआइटी मद्रास के निदेशक डॉ. भास्कर रामामूर्ति की यह बात उचित ही है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद कम ही छात्र ऐसे होते हैं, जो एक टीचर के रूप में अपना करियर आरंभ करना चाहते हैं। ज्यादातर छात्र विदेश की राह पकड़ लेते हैं। ऐसे में टीचिंग के प्रोफेशन के प्रति नए सिरे से आकर्षण पैदा किए जाने की जरूरत है, ताकि डॉक्टर, इंजीनियर, आइएएस, आइटी प्रोफेशनल, जर्नलिस्ट, वकील आदि पेशों की तरह छात्र भी स्कूली दिनों से ही अध्यापक बनने का सपना देख सकें और टीचिंग को अपने करियर की मंजिल मानकर आगे बढ़ सकें। ऐसी स्थिति उत्पन्न करने के लिए जितने जरूरी सरकारी उपाय हैं, उतना ही जरूरी हम सभी को अपना माइंड-सेट बदलने की भी है।सुकून, सम्मान और सुविधाएं1टीचिंग के प्रोफेशन में अब सैलरी तो आकर्षक है ही, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि और किसी भी प्रोफेशन की तुलना में इसमें आज भी अधिकतम सुकून, सबसे अधिक सम्मान और सुविधाओं का होना है। अन्य नौकरियों की तरह इसमें अनावश्यक तनाव भी बिल्कुल नहीं है। हां, इस पेशे में आपका सम्मान इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसके प्रति कितनी ईमानदारी बरत रहे हैं, क्योंकि यह दूसरे पेशों की तरह कतई नहीं है। इसमें आपको देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझने की जरूरत होती है। आप सिर्फ एक बच्चे को ही नहीं पढ़ाते, बल्कि देश के एक जिम्मेदार नागरिक को तैयार करते हैं। उन्हीं में से कोई आप जैसा काबिल अध्यापक बनेगा, तो कोई देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, न्यायाधीश, कलेक्टर, दुनिया में देश को पहचान दिलाने वाले प्रोफेशनल कुछ भी बन सकता है। सोचिए, जब आपको पता चलता है कि आपके किसी शिष्य ने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की है, तो कितनी खुशी मिलती होगी। युवा बढ़ाएं कदम देश के युवाओं को भी यह सोचना होगा कि सिर्फ अपने लिए पद और पैसा कमाने में ही जीवन की सार्थकता नहीं है, बल्कि देश और समाज के लिए अपने दायित्वों को समझने और उन्हें पूरा करने में है। ऐसे में उन्हें टीचिंग के प्रति रुझान बढ़ाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इस ओर आएं। बदलते समय के मुताबिक खुद भी पढ़ें और अपडेट रहें, साथ ही शिक्षण संस्थानों आदि के जरिए या स्वयं की पहल से दूसरों को पढ़ाएं। हम सब ऐसा करेंगे, तो ही देश लगातार आगे की ओर बढ़ेगा। हमारे यहां करीब 800 विश्वविद्यालय, 94 केंद्रीय विवि, 76 कृषि विवि, 4000 कॉलेज और 1000 कृषि कॉलेज हैं।’ हमारे देश में हर साल 2.75 करोड़ छात्र स्नातक कक्षाओं में दाखिला लेते हैं, जिनमें से 3.5 लाख अकेले इंजीनियरिंग के होते हैं।
Source- Dainik Jagran
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पढ़ें पढ़ाएं- देश को बढ़ाएं
देश के भावी कर्णधारों
देश में पठन-पाठन के प्रति लगाव रखने और इस दिशा में समुचित कदम उठाये जाने की लगातार आवाज उठाने वाले लोगों का ध्यान कल की दो ताजा खबरों ने जरूर खींचा होगा। हमेशा की तरह एक चिंताजनक खबर यह थी कि आइआइटी जैसे संस्थानों तक को ढूंढ़ने के बावजूद काबिल शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राहत देने वाली खबर यह थी कि उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में अब पढ़ाई के साथ-साथ पढ़ाना भी जरूरी करने पर विचार किया जा रहा है।
उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि आगामी आम बजट में केंद्र सरकार द्वारा इस बारे में विधिवत घोषणा भी की जा सकती है। फिलहाल बीएड जैसे टीचिंग से जुड़े पाठ्यक्रमों में ही छात्रों को पढ़ने के साथ पढ़ाने की अनिवार्यता है। यह योजना लागू हो जाने के बाद स्नातक कोर्सो के छात्रों को हर सप्ताह कम से कम तीन घंटे पढ़ाना होगा। शिक्षण प्रशिक्षण की जरूरत को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों से अपनी सुविधा के अनुसार आसपास के शिक्षण संस्थानों में सेवाएं देने की बार-बार की अपीलों की वजह से ऐसे तमाम लोगों ने स्कूलों में पढ़ाने की सकारात्मक पहल की है। अगर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय की इस प्रस्तावित योजना ने मूर्त रूप ले लिया, तो स्कूलों में अध्यापकों की कमी की काफी हद तक भरपाई की जा सकेगी।1आकर्षण बढ़ाने की जरूरत1हर किसी की जिंदगी को सही दिशा देने में अध्यापक का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी को अपने जीवन में कोई न कोई कभी न भुलाये जा सकने वाले टीचर जरूर मिले होंगे। आज हमें देश के भावी कर्णधारों को गढ़ने वाले सबसे काबिल अध्यापकों की सबसे ज्यादा जरूरत है। पर विडंबना यह है कि पिछले एक-दो दशकों से टीचिंग को उपेक्षित पेशा जैसा मान लिया गया है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं की दिलचस्पी ज्यादा पैसे वाली आकर्षक नौकरियों में है। हालांकि हाल के वर्षो में प्राइमरी से लेकर कॉलेज-विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तक को मिलने वाली सैलरी और सुविधाओं में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है, इसके बावजूद टीचिंग के प्रति युवाओं में क्रेज जैसी कोई बात नहीं बन पा रही है। ऐसे में इस सबसे सम्मानित पेशे का प्रचार-प्रसार करने, इसमें और आकर्षण जोड़ने और युवा पीढ़ी को इसके प्रति आकर्षित करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत महसूस की जा रही है। जिस तरह एक कुम्हार या मूर्तिकार कच्ची मिट्टी को अपने कुशल हाथों से तराश कर तरह-तरह का मनभावन रूप दे देता है, उसी तरह एक अध्यापक भी बच्चों को संस्कार-ज्ञान-समझदारी की शिक्षा देकर जिम्मेदार नागरिक बनाने में अपना योगदान देता है। 1काबिल फैकल्टी की चुनौती!1दिल्ली, मद्रास, खड़गपुर सहित देश की सभी 23 आइआइटी में फिलहाल औसतन 35 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी की कमी है। खड़गपुर की स्थिति तो और भी बदतर है, जहां 69 फीसदी फैकल्टी के पद खाली हैं। सरकार के दबाव और इन संस्थानों द्वारा लगातार विज्ञापन दिए जाने के बावजूद सालाना 15 से 20 प्रतिशत पद ही भरे जा पा रहे हैं। सक्षम फैकल्टी न मिलने की बात पर आइआइटी मद्रास के निदेशक डॉ. भास्कर रामामूर्ति की यह बात उचित ही है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद कम ही छात्र ऐसे होते हैं, जो एक टीचर के रूप में अपना करियर आरंभ करना चाहते हैं। ज्यादातर छात्र विदेश की राह पकड़ लेते हैं। ऐसे में टीचिंग के प्रोफेशन के प्रति नए सिरे से आकर्षण पैदा किए जाने की जरूरत है, ताकि डॉक्टर, इंजीनियर, आइएएस, आइटी प्रोफेशनल, जर्नलिस्ट, वकील आदि पेशों की तरह छात्र भी स्कूली दिनों से ही अध्यापक बनने का सपना देख सकें और टीचिंग को अपने करियर की मंजिल मानकर आगे बढ़ सकें। ऐसी स्थिति उत्पन्न करने के लिए जितने जरूरी सरकारी उपाय हैं, उतना ही जरूरी हम सभी को अपना माइंड-सेट बदलने की भी है। सुकून, सम्मान और सुविधाएं टीचिंग के प्रोफेशन में अब सैलरी तो आकर्षक है ही, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि और किसी भी प्रोफेशन की तुलना में इसमें आज भी अधिकतम सुकून, सबसे अधिक सम्मान और सुविधाओं का होना है। अन्य नौकरियों की तरह इसमें अनावश्यक तनाव भी बिल्कुल नहीं है। हां, इस पेशे में आपका सम्मान इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसके प्रति कितनी ईमानदारी बरत रहे हैं, क्योंकि यह दूसरे पेशों की तरह कतई नहीं है। इसमें आपको देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझने की जरूरत होती है। आप सिर्फ एक बच्चे को ही नहीं पढ़ाते, बल्कि देश के एक जिम्मेदार नागरिक को तैयार करते हैं। उन्हीं में से कोई आप जैसा काबिल अध्यापक बनेगा, तो कोई देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, न्यायाधीश, कलेक्टर, दुनिया में देश को पहचान दिलाने वाले प्रोफेशनल कुछ भी बन सकता है। सोचिए, जब आपको पता चलता है कि आपके किसी शिष्य ने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की है, तो कितनी खुशी मिलती होगी। युवा बढ़ाएं कदम देश के युवाओं को भी यह सोचना होगा कि सिर्फ अपने लिए पद और पैसा कमाने में ही जीवन की सार्थकता नहीं है, बल्कि देश और समाज के लिए अपने दायित्वों को समझने और उन्हें पूरा करने में है। ऐसे में उन्हें टीचिंग के प्रति रुझान बढ़ाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इस ओर आएं। बदलते समय के मुताबिक खुद भी पढ़ें और अपडेट रहें, साथ ही शिक्षण संस्थानों आदि के जरिए या स्वयं की पहल से दूसरों को पढ़ाएं। हम सब ऐसा करेंगे, तो ही देश लगातार आगे की ओर बढ़ेगा।1श में पठन-पाठन के प्रति लगाव रखने और इस दिशा में समुचित कदम उठाये जाने की लगातार आवाज उठाने वाले लोगों का ध्यान कल की दो ताजा खबरों ने जरूर खींचा होगा। हमेशा की तरह एक चिंताजनक खबर यह थी कि आइआइटी जैसे संस्थानों तक को ढूंढ़ने के बावजूद काबिल शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राहत देने वाली खबर यह थी कि उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में अब पढ़ाई के साथ-साथ पढ़ाना भी जरूरी करने पर विचार किया जा रहा है। उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि आगामी आम बजट में केंद्र सरकार द्वारा इस बारे में विधिवत घोषणा भी की जा सकती है। फिलहाल बीएड जैसे टीचिंग से जुड़े पाठ्यक्रमों में ही छात्रों को पढ़ने के साथ पढ़ाने की अनिवार्यता है। यह योजना लागू हो जाने के बाद स्नातक कोर्सो के छात्रों को हर सप्ताह कम से कम तीन घंटे पढ़ाना होगा। शिक्षण प्रशिक्षण की जरूरत को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों से अपनी सुविधा के अनुसार आसपास के शिक्षण संस्थानों में सेवाएं देने की बार-बार की अपीलों की वजह से ऐसे तमाम लोगों ने स्कूलों में पढ़ाने की सकारात्मक पहल की है। अगर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय की इस प्रस्तावित योजना ने मूर्त रूप ले लिया, तो स्कूलों में अध्यापकों की कमी की काफी हद तक भरपाई की जा सकेगी।आकर्षण बढ़ाने की जरूरत1हर किसी की जिंदगी को सही दिशा देने में अध्यापक का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी को अपने जीवन में कोई न कोई कभी न भुलाये जा सकने वाले टीचर जरूर मिले होंगे। आज हमें देश के भावी कर्णधारों को गढ़ने वाले सबसे काबिल अध्यापकों की सबसे ज्यादा जरूरत है। पर विडंबना यह है कि पिछले एक-दो दशकों से टीचिंग को उपेक्षित पेशा जैसा मान लिया गया है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं की दिलचस्पी ज्यादा पैसे वाली आकर्षक नौकरियों में है। हालांकि हाल के वर्षो में प्राइमरी से लेकर कॉलेज-विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तक को मिलने वाली सैलरी और सुविधाओं में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है, इसके बावजूद टीचिंग के प्रति युवाओं में क्रेज जैसी कोई बात नहीं बन पा रही है। ऐसे में इस सबसे सम्मानित पेशे का प्रचार-प्रसार करने, इसमें और आकर्षण जोड़ने और युवा पीढ़ी को इसके प्रति आकर्षित करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत महसूस की जा रही है। जिस तरह एक कुम्हार या मूर्तिकार कच्ची मिट्टी को अपने कुशल हाथों से तराश कर तरह-तरह का मनभावन रूप दे देता है, उसी तरह एक अध्यापक भी बच्चों को संस्कार-ज्ञान-समझदारी की शिक्षा देकर जिम्मेदार नागरिक बनाने में अपना योगदान देता है। काबिल फैकल्टी की चुनौती! दिल्ली, मद्रास, खड़गपुर सहित देश की सभी 23 आइआइटी में फिलहाल औसतन 35 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी की कमी है। खड़गपुर की स्थिति तो और भी बदतर है, जहां 69 फीसदी फैकल्टी के पद खाली हैं। सरकार के दबाव और इन संस्थानों द्वारा लगातार विज्ञापन दिए जाने के बावजूद सालाना 15 से 20 प्रतिशत पद ही भरे जा पा रहे हैं। सक्षम फैकल्टी न मिलने की बात पर आइआइटी मद्रास के निदेशक डॉ. भास्कर रामामूर्ति की यह बात उचित ही है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद कम ही छात्र ऐसे होते हैं, जो एक टीचर के रूप में अपना करियर आरंभ करना चाहते हैं। ज्यादातर छात्र विदेश की राह पकड़ लेते हैं। ऐसे में टीचिंग के प्रोफेशन के प्रति नए सिरे से आकर्षण पैदा किए जाने की जरूरत है, ताकि डॉक्टर, इंजीनियर, आइएएस, आइटी प्रोफेशनल, जर्नलिस्ट, वकील आदि पेशों की तरह छात्र भी स्कूली दिनों से ही अध्यापक बनने का सपना देख सकें और टीचिंग को अपने करियर की मंजिल मानकर आगे बढ़ सकें। ऐसी स्थिति उत्पन्न करने के लिए जितने जरूरी सरकारी उपाय हैं, उतना ही जरूरी हम सभी को अपना माइंड-सेट बदलने की भी है।सुकून, सम्मान और सुविधाएं1टीचिंग के प्रोफेशन में अब सैलरी तो आकर्षक है ही, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि और किसी भी प्रोफेशन की तुलना में इसमें आज भी अधिकतम सुकून, सबसे अधिक सम्मान और सुविधाओं का होना है। अन्य नौकरियों की तरह इसमें अनावश्यक तनाव भी बिल्कुल नहीं है। हां, इस पेशे में आपका सम्मान इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसके प्रति कितनी ईमानदारी बरत रहे हैं, क्योंकि यह दूसरे पेशों की तरह कतई नहीं है। इसमें आपको देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझने की जरूरत होती है। आप सिर्फ एक बच्चे को ही नहीं पढ़ाते, बल्कि देश के एक जिम्मेदार नागरिक को तैयार करते हैं। उन्हीं में से कोई आप जैसा काबिल अध्यापक बनेगा, तो कोई देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, न्यायाधीश, कलेक्टर, दुनिया में देश को पहचान दिलाने वाले प्रोफेशनल कुछ भी बन सकता है। सोचिए, जब आपको पता चलता है कि आपके किसी शिष्य ने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की है, तो कितनी खुशी मिलती होगी। युवा बढ़ाएं कदम देश के युवाओं को भी यह सोचना होगा कि सिर्फ अपने लिए पद और पैसा कमाने में ही जीवन की सार्थकता नहीं है, बल्कि देश और समाज के लिए अपने दायित्वों को समझने और उन्हें पूरा करने में है। ऐसे में उन्हें टीचिंग के प्रति रुझान बढ़ाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इस ओर आएं। बदलते समय के मुताबिक खुद भी पढ़ें और अपडेट रहें, साथ ही शिक्षण संस्थानों आदि के जरिए या स्वयं की पहल से दूसरों को पढ़ाएं। हम सब ऐसा करेंगे, तो ही देश लगातार आगे की ओर बढ़ेगा। हमारे यहां करीब 800 विश्वविद्यालय, 94 केंद्रीय विवि, 76 कृषि विवि, 4000 कॉलेज और 1000 कृषि कॉलेज हैं।’ हमारे देश में हर साल 2.75 करोड़ छात्र स्नातक कक्षाओं में दाखिला लेते हैं, जिनमें से 3.5 लाख अकेले इंजीनियरिंग के होते हैं।
Source- Dainik Jagran
Saturday, January 20, 2018
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इसलिए हमें यह समझने की जरूरत है कि करियर में हमें पूर्ण संतुष्टि औरआनंद का एहसास क्या देता है। यहां कुछ कदम बताए गए हैं, जो आप अपना करियर डिटॉक्स करने के लिए उठा सकते हैं: मन में करें शुरुआत अपने करियर का ऑडिट करें। जब आप अपने जीवन की पुन: योजना बनाते हैं, तब काम और करियर के सभी खराब अनुभवों को बाहर बह जाने दें। यह समङों कि अभी तक आपकी करियर यात्र क्या रही है, अपनी शक्तियों और कमजोरियों को लिखें और अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्रों की पहचान करें। यह पहचान करें कि आपकी रुचि किन क्षेत्रों में है। आपके जुनून क्या हैं और वह क्या है, जिस पर आप अपने शेष जीवनकाल में ध्यान एकाग्र करना चाहते हैं। उस चीज को खोजें, जिसकी ओर आपकी रुचियां हैं। शायद वह आपके करियर के शेष भाग के लिए एक नया आरंभिक बिंदु होगा। हुनर को दें नया रूप यह संभव है कि आप वित्त प्रबंधन में अच्छे हों, फिर भी वित्त व्यवस्था से जुड़े करियर में काम करने का विचार आपको बिल्कुल भी रोमांचित न करता हो। शायद आप खेलकूद में भी अच्छे हों, लेकिन अपनी आयु को देखते हुए एक खिलाड़ी के रूप में करियर बनाने की नहीं सोच सकते। इस स्थिति में दोनों का मिश्रण कीजिए। खेलकूद में अपनी रुचि और वित्त प्रबंधन में अपने हुनर का मिश्रण कीजिए। शायद आप खेलकूद के सितारों के लिए वित्त प्रबंधन करने के करियर के चारों ओर काम कर सकें। इसी तरह, आप दो या दो से अधिक करियर क्षेत्रों के हुनर का मिश्रण कर सकते हैं और करियर के एक नए मार्ग का सृजन कर सकते हैं। जारी रखें सीखना नए पाठ्यक्रमों में प्रवेश लीजिए। आप जिन विषयों में अच्छे हैं, उन्हें और ज्यादा गहराई से खंगालिए या ऐसे करियर स्ट्रीम में प्रवेश लीजिए, जो आपके लिए पूर्णतया नए हैं।
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लाइफ स्किल
‘डिटॉक्स’
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जब हम ‘डिटॉक्स’ शब्द सुनते हैं, तो शायद हम अपनी सब्जियों की मात्र बढ़ाने, शराब का सेवन बंद करने और अपनी त्वचा का पोषण करने की सोचते हैं। जैसे हमारे स्वास्थ्य के लिए हमारे शरीर को डिटॉक्स करना बेहद जरूरी है, ठीक वैसे ही अपने करियर को डिटॉक्स करने से हमें अनेक लाभ मिल सकते हैं। जैसे खान-पान की अस्वास्थ्यकर आदतें और खराब चयन हमारी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, ठीक वैसे ही अपने करियर में नाखुश होना हमारे कल्याण के लिए उतना ही जहरीला होता है।
इसलिए हमें यह समझने की जरूरत है कि करियर में हमें पूर्ण संतुष्टि औरआनंद का एहसास क्या देता है। यहां कुछ कदम बताए गए हैं, जो आप अपना करियर डिटॉक्स करने के लिए उठा सकते हैं: मन में करें शुरुआत अपने करियर का ऑडिट करें। जब आप अपने जीवन की पुन: योजना बनाते हैं, तब काम और करियर के सभी खराब अनुभवों को बाहर बह जाने दें। यह समङों कि अभी तक आपकी करियर यात्र क्या रही है, अपनी शक्तियों और कमजोरियों को लिखें और अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्रों की पहचान करें। यह पहचान करें कि आपकी रुचि किन क्षेत्रों में है। आपके जुनून क्या हैं और वह क्या है, जिस पर आप अपने शेष जीवनकाल में ध्यान एकाग्र करना चाहते हैं। उस चीज को खोजें, जिसकी ओर आपकी रुचियां हैं। शायद वह आपके करियर के शेष भाग के लिए एक नया आरंभिक बिंदु होगा। हुनर को दें नया रूप यह संभव है कि आप वित्त प्रबंधन में अच्छे हों, फिर भी वित्त व्यवस्था से जुड़े करियर में काम करने का विचार आपको बिल्कुल भी रोमांचित न करता हो। शायद आप खेलकूद में भी अच्छे हों, लेकिन अपनी आयु को देखते हुए एक खिलाड़ी के रूप में करियर बनाने की नहीं सोच सकते। इस स्थिति में दोनों का मिश्रण कीजिए। खेलकूद में अपनी रुचि और वित्त प्रबंधन में अपने हुनर का मिश्रण कीजिए। शायद आप खेलकूद के सितारों के लिए वित्त प्रबंधन करने के करियर के चारों ओर काम कर सकें। इसी तरह, आप दो या दो से अधिक करियर क्षेत्रों के हुनर का मिश्रण कर सकते हैं और करियर के एक नए मार्ग का सृजन कर सकते हैं। जारी रखें सीखना नए पाठ्यक्रमों में प्रवेश लीजिए। आप जिन विषयों में अच्छे हैं, उन्हें और ज्यादा गहराई से खंगालिए या ऐसे करियर स्ट्रीम में प्रवेश लीजिए, जो आपके लिए पूर्णतया नए हैं।
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Monday, January 8, 2018
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Monday, January 1, 2018
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नए साल पर लाइफ को करें रीसेट
पूरे संसार में नए साल के आगमन का उत्सव पूरे उल्लास-उमंग से मनाया जाता है। नए साल के आगमन पर एक सुदृढ़ परंपरा है कि लोग अपने अंदर सुधार लाने या अपनी बेहतरी के लिए नए-नए संकल्प ग्रहण करते हैं। ये वजन घटाने के सरल संकल्प से लेकर तनावपूर्ण संबंधों में सुधार लाने और इसी तरह के अन्य संकल्प हो सकते हैं। मनुष्य की इच्छाओं की भांति इन संकल्पों की सूची भी अनंत है।
इसके अलावा, जनवरी को हम जो उत्सव मनाते हैं, वह कुछ नहीं अपितु वही जार्जियाई कैलेंडर है, जिसे पूरे संसार में प्रमुखता से स्वीकार किया जाता है, हालांकि भारत सहित अनेक देशों में नए साल का उत्सव मनाने के लिए उनकी अपनी परंपराएं, तिथियां और रीतियां हैं। उदाहरणार्थ, भारत में विभिन्न राज्य फसलों की कटाई के समय, गुड़ी पाड़वा, बैसाखी आदि के रूप में नए साल का उत्सव मनाते हैं। इसी तरह, वहां नए साल के अवसर पर सौभाग्यशाली होने के अनुष्ठान किए जाने की भी परंपरा है। पुर्तगाली देशों में लोग, जिनके लिए वृत्त अर्थात गोल घेरा सफलता का प्रतीक है, डोनट खाते हैं। जापानी लोग नए साल के अवसर पर पिछले साल की समस्याओं एवं चिंताओं को विदा करने और एक बेहतर साल की तैयारी करने के लिए ‘बोनेंकैई’ अर्थात ‘पुराने साल-को-भूल जाओ’ दावत का आयोजन करते हैं।1 बहरहाल, बदलते तमाम सालों के दौरान, मैं हमेशा हैरान रहा हूं कि इस दिन ऐसा क्या इतना कुछ बदल जाता है कि यह एक पूरे विश्वव्यापी उत्सव में बदल जाता है? मध्य रात्रि में घड़ी की सूइयों के 12:00 पर पहुंचते ही ऐसा क्या होता है कि पूरा संसार एक-दूसरे को नए साल की बधाई देने लगता है। चारों ओर आसमान में आतिशबाजी होने लगती है और लोग बस पूरे जोश से पार्टी कर रहे होते हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो नया साल सभी चीजों को ठीक करने के लिए एक आधिकारिक रीसेट बटन है। यह कंप्यूटरों की भाषा में एक trlकी तरह है, जो हमें हमारे हृदय में बूट करता है। इसलिए मित्रो, भले उत्सव मनाने के लिए आपका कारण कुछ भी हो, आनंद फिल्म का सदाबहार गीत याद जरूर रखिये: जिंदगी, कैसी है पहेली हाये, कभी ये हंसाये, कभी ये रुलाये..। नव वर्ष शुभ हो। भले ही आप कुछ भी करें, सदा मुस्कुराते रहें
लाइफ स्किल
विनीत टंडन (म्यूजिक मोटिवेशनल स्पीकर)
Tuesday, December 19, 2017
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हास्य-व्यंग्य
किसी भी सरकारी दफ्तर में काम कराना हो तो सबसे पहले चाहिए एफिडेविट। इसे शुद्ध हिंदी में शपथपत्र तो उर्दू जुबान में हलफनामा कहते हैं। बहरहाल इससे जुड़े तमाम पहलू भी कम दिलचस्प नहीं हैं और इनमें से तमाम हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं। मसलन एफिडेविट-शपथपत्र, लाइसेंस खो गया है नया बनवाना है तो शपथ दीजिए, एफिडेविट दीजिए। विकराल सा दफ्तर, खुद को अफसर समझते दलाल और दलाली खाते अफसर, हाथ बांधकर सिर्फ आम आदमी ही नहीं, खास आदमी भी खड़ा हो जाता है।
सिर्फ सरकारी आदमी को ही पता होता है कि इस विकराल किले की चाबियां हैं कहां। शपथपत्र दो-मैं अलां पुत्र फलां का निवासी......
अकड़फूं अफसर सीधे बात करने को तैयार नहीं, दलाल को इतने या उतने हजार चाहिए। जेब में उतने हजार न हो, तो इंसानी तो क्या कुत्ते जैसा सुलूक भी न मिले। वहां जाइए। वहां जाकर पता लगता है कि- नहीं जी यहां नहीं आना था, आप को तो वहां जाना था। जी वहां जाकर पता लगता है कि भाई साहब आप तो पढ़े लिखे होकर कैसी बातें कर रहे हैं? वहां, वहां, वहां जाना था। वहां, वहां, वहां जाकर पता लगता है कि वहां वाले तो आए ही नहीं हैं। कब आएंगे, जी पता नहीं। कब आएंगे, यह आपको बताकर जाएंगे क्या? क्या अफसर आपको बताने के लिए बने हैं? जी तो हम कब आएं अपने काम के लिए? जब मन करे तब आइए, सरकार का दफ्तर है। कोई मनाही थोड़े ही आने की। चाहे जब आइए, दफ्तर के बाहर समोसे की दुकानों से समोसे खाकर चले जाइए। क्या कहा काम के लिए आना है, समोसे खाने नहीं। तो रोज आकर पूछ लीजिए कि वह कब आएंगे जिनसे आपका काम पड़ता है।
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हास्य-व्यंग्य-------हलफनामा
हलफनामा
किसी भी सरकारी दफ्तर में काम कराना हो तो सबसे पहले चाहिए एफिडेविट। इसे शुद्ध हिंदी में शपथपत्र तो उर्दू जुबान में हलफनामा कहते हैं। बहरहाल इससे जुड़े तमाम पहलू भी कम दिलचस्प नहीं हैं और इनमें से तमाम हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं। मसलन एफिडेविट-शपथपत्र, लाइसेंस खो गया है नया बनवाना है तो शपथ दीजिए, एफिडेविट दीजिए। विकराल सा दफ्तर, खुद को अफसर समझते दलाल और दलाली खाते अफसर, हाथ बांधकर सिर्फ आम आदमी ही नहीं, खास आदमी भी खड़ा हो जाता है।
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| P-Point Computorium |
सिर्फ सरकारी आदमी को ही पता होता है कि इस विकराल किले की चाबियां हैं कहां। शपथपत्र दो-मैं अलां पुत्र फलां का निवासी......
सरकारी अफसरों की अकड़फूं देखकर सरकारी दफ्तर में तो अपने इंसान होने तक पर शक होने लगता है, बाकी की शपथ क्या लें। उस दिन उस सरकारी दफ्तर में वह क्लर्क इस अंदाज में मुझसे बात कर रहा था कि कुछ देर के लिए तो मुङो अपने इंसान होने पर शक होने लगा। बाद में मुङो पता लगा कि वह क्लर्क हर बंदे को मुर्गी या बकरा समझता है कि जिसे आखिर में कटना ही है।
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| P-Point Computorium |
अकड़फूं अफसर सीधे बात करने को तैयार नहीं, दलाल को इतने या उतने हजार चाहिए। जेब में उतने हजार न हो, तो इंसानी तो क्या कुत्ते जैसा सुलूक भी न मिले। वहां जाइए। वहां जाकर पता लगता है कि- नहीं जी यहां नहीं आना था, आप को तो वहां जाना था। जी वहां जाकर पता लगता है कि भाई साहब आप तो पढ़े लिखे होकर कैसी बातें कर रहे हैं? वहां, वहां, वहां जाना था। वहां, वहां, वहां जाकर पता लगता है कि वहां वाले तो आए ही नहीं हैं। कब आएंगे, जी पता नहीं। कब आएंगे, यह आपको बताकर जाएंगे क्या? क्या अफसर आपको बताने के लिए बने हैं? जी तो हम कब आएं अपने काम के लिए? जब मन करे तब आइए, सरकार का दफ्तर है। कोई मनाही थोड़े ही आने की। चाहे जब आइए, दफ्तर के बाहर समोसे की दुकानों से समोसे खाकर चले जाइए। क्या कहा काम के लिए आना है, समोसे खाने नहीं। तो रोज आकर पूछ लीजिए कि वह कब आएंगे जिनसे आपका काम पड़ता है।
सरकारी दफ्तर में मान लीजिए ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का दफ्तर, लाइसेंस वगैरह यहीं से मिलने हैं। एक नौजवान बोला-जी मुङो सिर्फ बाइक चलाने का लाइसेंस चाहिए। दलाल बोला-देख भाई इत्ते दे दे, कार चलाने का भी उसी में जुड़ जाएगा, पर मेरे पास कार है कहां, उसका लाइसेंस नहीं चाहिए। मेरे पास भी ट्रक कहां है, पर मेरे पास ट्रक चलाने का लाइसेंस है-दलाल ने स्पष्टीकरण दिया।
ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के दफ्तर जाकर मेरा यकीन लाइसेंसिंग सिस्टम से ही उठ गया है। अब जब कोई हवाई दुर्घटना होती है, मुङो शक होने लगता है कि दुर्घटनाग्रस्त हवाई जहाज का लाइसेंस भी उसी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के दफ्तर से गया होगा जो बाइक के साथ कार चलाने का लाइसेंस यूं ही नहीं, कुछेक हजार में दे देती है। अथॉरिटी से बना पायलट भी क्या करे, कुछेक हजार में पायलेट का लाइसेंस ले आएगा तो फिर जहाज तो उड़ाना पड़ेगा।
एक हवाई यात्र के दौरान मैंने एक पायलेट से यूं ही पूछ लिया कि भाई आपके पास हवाई जहाज चलाने का पक्का लाइसेंस है न। पायलट ने उलटे पूछ लिया-यह सवाल आप देश चलाने वालों से तो कभी नहीं पूछते कि क्या उनके पास देश चलाने का पक्का लाइसेंस, सच्ची काबिलियत है। सारी अफसरी हम पर ही दिखा रहे हैं आप। बात में बहुत दम है। हरेक से तो हम नहीं पूछते कि तेरे पास लाइसेंस है क्या? पायलेट के हादसे के बाद मैंने लाइसेंस का सवाल, काबिलियत का सवाल किसी से भी पूछना बंद कर दिया। अभी एक डॉक्टर के यहां जाना हुआ, शक हुआ पर पूछने की हिम्मत नहीं हुई, वरना वही जवाब सुनना होता-देश चलाने वालों से तो कभी न पूछते, क्लीनिक चलाने वालों से पूछ रहे हैं।
ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के दफ्तर जाकर मेरा यकीन लाइसेंसिंग सिस्टम से ही उठ गया है। अब जब कोई हवाई दुर्घटना होती है, मुङो शक होने लगता है कि दुर्घटनाग्रस्त हवाई जहाज का लाइसेंस भी उसी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के दफ्तर से गया होगा जो बाइक के साथ कार चलाने का लाइसेंस यूं ही नहीं, कुछेक हजार में दे देती है। अथॉरिटी से बना पायलट भी क्या करे, कुछेक हजार में पायलेट का लाइसेंस ले आएगा तो फिर जहाज तो उड़ाना पड़ेगा।
एक हवाई यात्र के दौरान मैंने एक पायलेट से यूं ही पूछ लिया कि भाई आपके पास हवाई जहाज चलाने का पक्का लाइसेंस है न। पायलट ने उलटे पूछ लिया-यह सवाल आप देश चलाने वालों से तो कभी नहीं पूछते कि क्या उनके पास देश चलाने का पक्का लाइसेंस, सच्ची काबिलियत है। सारी अफसरी हम पर ही दिखा रहे हैं आप। बात में बहुत दम है। हरेक से तो हम नहीं पूछते कि तेरे पास लाइसेंस है क्या? पायलेट के हादसे के बाद मैंने लाइसेंस का सवाल, काबिलियत का सवाल किसी से भी पूछना बंद कर दिया। अभी एक डॉक्टर के यहां जाना हुआ, शक हुआ पर पूछने की हिम्मत नहीं हुई, वरना वही जवाब सुनना होता-देश चलाने वालों से तो कभी न पूछते, क्लीनिक चलाने वालों से पूछ रहे हैं।
दिल्ली के करीब एक निजी अस्पताल ने सोलह लाख रुपये का बिल दिखाया एक मौत का। सोलह लाख में मौत, बड़े निजी अस्पताल की काबिलियत है। बिना कोई टीका-इंजेक्शन लगाए हुए मारना सरकारी अस्पतालों की काबिलियत है। हाल में एक सरकारी अस्पताल में नकली दवाओं की शिकायत आई तो इसकी जांच में पता चला कि सरकारी अस्पतालों की खरीदी गई दवाएं कभी भी अस्पताल पहुंचती ही नहीं-क्या असली क्या नकली। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरी लापरवाही से ही बंदा मर सकता है, दवाओं पर इसका इल्जाम न लगाया जाए।
खैर, अभी एक सरकारी दफ्तर में एफिडेविट दाखिल करना पड़ा जिसमें लिखना था-मैं सच्चरित्र और सच्चा नागरिक हूं। मेरी मां ही मुङो कभी सच्चा न मानती, मां तो मान भी ले, बीवी न मानती और मैं जमाने भर के सामने घोषणा करूं कि मैं सच्चा हूं। मैंने आपत्ति की-भाई दुश्चरित्र और झूठे को भी जीने दो, यह लाइन हटा दो।
बाबू ने बहुत ही फिलासफाना अंदाज में कहा-जीवन ही यूं पूरा झूठ चला जा रहा है जैसे कोई सरकारी एफिडेविट। मैंने कहा-भाई आपने तो कविता कर दी। क्लर्क ने बताया कि वह मूल रूप से कवि ही है, बतौर रिश्वत मुङो उसके दो काव्य संग्रह पूरे सुनने पड़ेंगे।
खैर, अभी एक सरकारी दफ्तर में एफिडेविट दाखिल करना पड़ा जिसमें लिखना था-मैं सच्चरित्र और सच्चा नागरिक हूं। मेरी मां ही मुङो कभी सच्चा न मानती, मां तो मान भी ले, बीवी न मानती और मैं जमाने भर के सामने घोषणा करूं कि मैं सच्चा हूं। मैंने आपत्ति की-भाई दुश्चरित्र और झूठे को भी जीने दो, यह लाइन हटा दो।
बाबू ने बहुत ही फिलासफाना अंदाज में कहा-जीवन ही यूं पूरा झूठ चला जा रहा है जैसे कोई सरकारी एफिडेविट। मैंने कहा-भाई आपने तो कविता कर दी। क्लर्क ने बताया कि वह मूल रूप से कवि ही है, बतौर रिश्वत मुङो उसके दो काव्य संग्रह पूरे सुनने पड़ेंगे।
आलोक पुराणिक
Source:- Dainik Jagran
Monday, December 11, 2017
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उत्तर प्रदेश के गरीबों, किसानों और असहाय वर्ग के लोगों को मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत आच्छादित किया गया है। इसका शासनादेश शुक्रवार को जारी हो चुका है। इसके लागू होने पर अब इन लोगों को ढाई लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। कृत्रिम अंग की जरूरत पड़ने पर एक लाख रुपये तक का इंप्लांट भी मुफ्त होगा। इस सुविधा को व्यवहार में लाने और उसकी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी संस्थागत वित्त, बीमा एवं बाह्य सहायतित परियोजना महानिदेशालय निभाएगा। चिकित्सा शिक्षा के सभी प्रधानाचार्य, निदेशक और कुलपति इसके नोडल अधिकारी होंगे।
इस बीमा से जुड़े अस्पताल सीजीएचएस की दरों पर 10 दिनों में क्लेम पेश करेंगे, जबकि बीमा कंपनी से 45 दिन के भीतर क्लेम राशि उन्हें देगी। इसके लिए किसान का नाम रेवन्यू विभाग के रिकार्ड या खतौनी में खातेदार या सहखातेदार के तौर पर लिखा होना जरूरी है। इसके साथ ही उम्र 18 से 70 वर्ष के बीच और सालाना पारिवारिक आय 75 हजार रुपये से कम होनी चाहिए। ऐसे परिवारों को राजस्व या ब्लॉक अधिकारी द्वारा जारी सार्टिफिकेट के आधार पर लाभ अनुमन्य होंगे।1प्रदेश सरकार की अन्य कई योजनाओं की तरह यह भी एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद गरीब जनता को इलाज के लिए अपनी जमीन, घर और जेवरात बेचने नहीं पड़ेंगे और न महाजन की शरण में जा कर अनापशनाप ब्याज पर कर्ज लेना पड़ेगा। आज के दौर में अस्पतालों में इलाज अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है, सरकारी अस्पतालों में भी महंगी दवा बाहर से ही खरीद कर देनी होती है। गरीबों के सामने बड़ी विकट समस्या हो जाती है। कई बार वह देखा देखी में प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर जाते हैं और उन्हें बहुत अधिक आर्थिक चोट उठानी पड़ती है। कम आय वर्ग के लोगों के लिए इस तरह की सुविधा देने के प्रयास कई वर्षो से चल रहे हैं लेकिन, कोई आसान प्रक्रिया तैयार नहीं हो पायी है। योगी सरकार से उम्मीद की जाती है कि अब तक की व्यावहारिक कठिनाइयों से सबक लेते हुए प्रदेश की जनता को यह लाभ दिलाएगी। सरकारी मशीनरी भी इसमें राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करेगी।
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मुफ्त इलाज
सरकार करेगी मुफ्त इलाज
उत्तर प्रदेश के गरीबों, किसानों और असहाय वर्ग के लोगों को मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत आच्छादित किया गया है। इसका शासनादेश शुक्रवार को जारी हो चुका है। इसके लागू होने पर अब इन लोगों को ढाई लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। कृत्रिम अंग की जरूरत पड़ने पर एक लाख रुपये तक का इंप्लांट भी मुफ्त होगा। इस सुविधा को व्यवहार में लाने और उसकी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी संस्थागत वित्त, बीमा एवं बाह्य सहायतित परियोजना महानिदेशालय निभाएगा। चिकित्सा शिक्षा के सभी प्रधानाचार्य, निदेशक और कुलपति इसके नोडल अधिकारी होंगे।
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| Muft ilaj- Sarvhit Bima Yojna |
इस बीमा से जुड़े अस्पताल सीजीएचएस की दरों पर 10 दिनों में क्लेम पेश करेंगे, जबकि बीमा कंपनी से 45 दिन के भीतर क्लेम राशि उन्हें देगी। इसके लिए किसान का नाम रेवन्यू विभाग के रिकार्ड या खतौनी में खातेदार या सहखातेदार के तौर पर लिखा होना जरूरी है। इसके साथ ही उम्र 18 से 70 वर्ष के बीच और सालाना पारिवारिक आय 75 हजार रुपये से कम होनी चाहिए। ऐसे परिवारों को राजस्व या ब्लॉक अधिकारी द्वारा जारी सार्टिफिकेट के आधार पर लाभ अनुमन्य होंगे।1प्रदेश सरकार की अन्य कई योजनाओं की तरह यह भी एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद गरीब जनता को इलाज के लिए अपनी जमीन, घर और जेवरात बेचने नहीं पड़ेंगे और न महाजन की शरण में जा कर अनापशनाप ब्याज पर कर्ज लेना पड़ेगा। आज के दौर में अस्पतालों में इलाज अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है, सरकारी अस्पतालों में भी महंगी दवा बाहर से ही खरीद कर देनी होती है। गरीबों के सामने बड़ी विकट समस्या हो जाती है। कई बार वह देखा देखी में प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर जाते हैं और उन्हें बहुत अधिक आर्थिक चोट उठानी पड़ती है। कम आय वर्ग के लोगों के लिए इस तरह की सुविधा देने के प्रयास कई वर्षो से चल रहे हैं लेकिन, कोई आसान प्रक्रिया तैयार नहीं हो पायी है। योगी सरकार से उम्मीद की जाती है कि अब तक की व्यावहारिक कठिनाइयों से सबक लेते हुए प्रदेश की जनता को यह लाभ दिलाएगी। सरकारी मशीनरी भी इसमें राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करेगी।
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